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Author Interview With Kamal Upadhyay | Published In Voice Of Jaipur

Here is one more candid memory of the Year 2019 we are keen to share with you.

During 2019, we got a chance to read another book “ILU (ईलू)” by author Kamal Upadhyay and also had a chance to have another Q/A session with him as well.

We are glad to share with you all that the interview was published in a popular Hindi newspaper – Voice Of Jaipur – in 14 December 2019 issue. Here we are cross-posting it for the quick reference of our readers.

Author Interview With Kamal Upadhyay | Published In Voice Of Jaipur

Author Interview With Kamal Upadhyay | Published In Voice Of Jaipur

The Interview in Text Format:

मैं चुराए हुए समय में लिखता हूँ

– कमल उपाध्याय

लंकापति का लोकतंत्र, हत्या और मिठाई जैसी अलग – अलग शैली की किताबें लिखने के बाद कमल उपाध्याय ने अपनी नई किताब ‘ईलू’ के साथ अपना एक और नया रूप हम सब के सामने प्रस्तुत किया है। बच्चों को ध्यान में रखकर लिखी गई किताब ‘ईलू’ वयस्क पाठकों को भी जरूर पढ़नी चाहिए। ईलू को पढ़ने के बाद हमें कमल उपाध्याय के साथ एक और साक्षात्कार करने का मौका मिल गया।

प्रश्न : आप कॉर्पोरेट जॉब के साथ – साथ किताबें लिखना कैसे मैनेज करते हैं?
उत्तर : मेरे लिए राइटर ब्लॉक का आना बहुत कठिन हैं क्योंकि मैं चुराए हुए समय में लिखता हूँ। कभी – कभी मुझे लगता है कि दिन तीस – बत्तीस घण्टे का होना चाहिए।

प्रश्न : ईलू को लिखने का श्रेय आप अपनी बेटी को क्यों देते हैं?
उत्तर : मेरी बाबा (बिटिया) के जन्म के बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं जो लिखता हूँ उसे समझने के लिए बाबा को बहुत साल लगेंगे, ऐसे में मुझे कुछ ऐसा लिखना चाहिए जो मैं उसे पढ़कर सुना सकूँ। बस वहीं से मैंने बाप – बेटी के रिश्तों को ध्यान में रखते हुए ईलू को लिखना शुरू कर दिया।

प्रश्न : आपने किताब के किरदारों का नाम कैसे निर्धारित किया ?
उत्तर : मुझे मुख्य किरदार का नाम ‘ई’ अक्षर से चाहिए था। अचानक से मुझे ‘ईलू’ नाम हिट हुआ। चीनो और टीनू का नाम स्वयं ही दिमाग में उपज आया। मार्लो का नाम उसके मसखरे अंदाज के कारण रखा, वो बदमाश लड़के कहते हैं ना, मुझे मार लो।

प्रश्न : पुस्तक का कवर पेज काफी आकर्षक है और आपका इस डिजाइन में कितना योगदान है? ?
उत्तर :अभी तक की मेरी सभी प्रकाशित किताबों में ‘ईलू’ का कवर मुझे सबसे अधिक प्रिय है। कवर के डिज़ाइनर चेतन अड़लक को मैं तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ। जिन्होंने मेरी सुनाई हुई कहानी के संक्षिप्त वर्णन को बहुत ही बढ़िया तरीके से कवर पर दर्शाया है।

प्रश्न : ईलू लिखने से आप कितने प्रभावित हुए हैं?
उत्तर : ईलू की यात्रा हमें साहस, संघर्ष और कभी ना हार मानने के लिए प्रेरित करती है और साथ ही दया भावना और समाज कल्याण के लिए प्रेरित करती है। दूसरी तरफ इसके हर किरदार का कोई ना कोई पहलू मुझसे जुड़ा है फिर चाहे वो कपिलो का अभिमानी होना ही क्यों ना हो।

प्रश्न : क्या ईलू पर आप कार्टून फिल्म बनते देखना चाहते हैं?
उत्तर : मैंने जब ईलू की कहानी को सोचा था, उस समय मैं एक फ़िल्म प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था और मैंने ईलू का पहला ड्राफ्ट स्क्रीनप्ले फॉरमैट में लिखा है। तो मैं बिल्कुल चाहता हूँ कि ईलू के ऊपर फ़िल्म या कार्टून सीरिज़ बनें और मुझे पूरी उम्मीद है कि ऐसा जरूर होगा।

प्रश्न : मुंबई लोकल की दैनिक यात्रा का आपके क्रिएटिव वर्क में क्या योगदान है?
उत्तर : मैंने अभी तक जो भी लिखा है उसका 95% मुंबई लोकल में लिखा है। मैंने तो एक फ़िल्म का पूरा डायलॉग मुंबई लोकल में लिखा है। मुंबई लोकल की भीड़ में ही मुझे वो तन्हाई मिलती है, जहाँ उंगलियां मोबाइल पर कहानी धड़ाधड़ टाइप करने लगती हैं।

प्रश्न : यदि कोई ऐसी चीज है जिसे आप व्यक्त करना चाहते हैं, लेकिन हमने इसके बारे में कोई प्रश्न नहीं पूछा है?
उत्तर : सोशल मीडिया पर बहुत से लोग एक शिकायत बार – बार करतें हैं कि मेरा ब्लॉग अब बहुत अधिक एक्टिव नहीं है। मैं अपने सभी पाठक मित्रों से इस बात के लिए क्षमा चाहता हूँ। किताब के अलावा कई अन्य तरह के राइटिंग प्रोजेक्टों में व्यस्त होने के कारण मुझे अब व्यंग्य पोस्ट लिखने का समय नहीं मिल पाता।

कमल उपाध्याय को हम तहे दिल से सवालों के बेबाक जवाब देने के लिए धन्यवाद देतें हैं।

Quick Links:

The original author interview was published here:

You can read it on the official website of the newspaper at:

You can find its reference on the official blog of the author at:

Quick Book Purchase Links:
Over To You:

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